News Desk: हर साल अक्टूबर आते ही देश में त्योहारों की रौनक बढ़ जाती है. इसी दौरान नवरात्रि और दुर्गा पूजा को लेकर लोगों में थोड़ा कन्फ्यूजन भी रहता है. दोनों ही मां दुर्गा की पूजा से जुड़े हैं, लेकिन इनका तरीका, माहौल और परंपरा अलग होती है. इस बार 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगी. वहीं दुर्गा पूजा का मुख्य उत्सव 16 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच मनाया जाएगा. तारीखें लगभग एक जैसी हैं, लेकिन दोनों का रंग-ढंग अलग है.
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नवरात्रि में क्या होता है खास
नवरात्रि का मतलब ही है नौ रातें. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. लोग व्रत रखते हैं, घरों और मंदिरों में पूजा करते हैं. कई जगहों पर गरबा और डांडिया की धूम रहती है. उत्तर भारत में रामलीला और दशहरा का माहौल भी इसी से जुड़ा होता है. यह त्योहार ज्यादा व्यक्तिगत और धार्मिक तरीके से मनाया जाता है. यानी घर-घर में पूजा, व्रत और श्रद्धा का माहौल.
दुर्गा पूजा का रंग और अंदाज अलग
अब बात करें दुर्गा पूजा की, तो यहां माहौल पूरी तरह बदल जाता है. खासकर पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में यह एक बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता है. बड़े-बड़े पंडाल बनते हैं. उनमें मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित होती है. षष्ठी से दशमी तक पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भीड़ का अलग ही माहौल देखने को मिलता है. अंतिम दिन यानी दशमी पर मूर्ति विसर्जन होता है, जो पूरे उत्सव का सबसे भावुक पल होता है.
दोनों में असली फर्क
नवरात्रि में ध्यान देवी के नौ रूपों की पूजा और व्रत पर होता है. यह ज्यादा शांत और धार्मिक स्वरूप में मनाया जाता है.
दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की महिषासुर पर जीत की कहानी को बड़े स्तर पर दिखाया जाता है. यहां पूजा के साथ-साथ उत्सव और सांस्कृतिक रंग ज्यादा दिखता है. एक और बड़ा फर्क यह है कि नवरात्रि पूरे देश में अलग-अलग रूप में मनाई जाती है. जबकि दुर्गा पूजा खासकर पूर्वी भारत की पहचान बन चुकी है.
त्योहार का बदलता अंदाज
आज के समय में लोग दोनों त्योहारों को अपने-अपने तरीके से एन्जॉय करते हैं. कोई व्रत रखता है, तो कोई पंडाल घूमने जाता है. शहरों में तो दोनों का मिक्स माहौल भी देखने को मिलता है. यही वजह है कि अब ये फर्क समझना जरूरी हो गया है, ताकि त्योहार की असली पहचान और परंपरा को सही तरीके से जाना जा सके. नवरात्रि हो या दुर्गा पूजा, दोनों का मकसद एक ही है. मां शक्ति की आराधना और बुराई पर अच्छाई की जीत. बस तरीका अलग है, और यही भारत की खूबसूरती भी है.


