Tuesday, September 29, 2026

“डिग्री के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ती है”: संतोष कुमार गंगवार

चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा का सप्तम दीक्षांत समारोह मंगलवार को वीर शहीद पोटो हो सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। झारखंड के महामहिम राज्यपाल सह राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दीक्षांत समारोह में 5,515 छात्र-छात्राओं को उपाधियां, 26 टॉपरों को स्वर्ण पदक तथा 39 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में पद्मश्री जानुम सिंह सोय, पद्मश्री चामी मुर्मू, आयुक्त रवि रंजन कुमार विक्रम, पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेणु, हो समाज के अध्यक्ष तथा टाटा कॉलेज एल्युमिनी एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील पूर्ति सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम के अनुसार समारोह की शुरुआत सुबह 11 बजे महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री संतोष कुमार गंगवार के कोल्हान विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर आगमन से हुई। कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता एवं विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया तथा पारंपरिक तरीके से अभिनंदन किया। इसके पश्चात अकादमिक परेड शुरू हुई और सभागार के मंच तक पहुंची। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान से हुई। कुलपति द्वारा महामहिम राज्यपाल का शॉल, स्मृति चिह्न एवं रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर अभिनंदन किया गया। इसके बाद दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय के कुलगीत का आयोजन हुआ।

कुलसचिव डॉ. अमर कुमार ने राज्यपाल से दीक्षांत समारोह को औपचारिक रूप से प्रारंभ करने की अनुमति मांगी, जिसके बाद राज्यपाल ने समारोह के उद्घाटन की घोषणा की। समारोह में विश्वविद्यालय की स्मारिका भी जारी की गई।इसके बाद कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक उपलब्धियों पर आधारित विश्वविद्यालय रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इसके पश्चात कुलसचिव ने विभिन्न संकायाध्यक्षों को PG बैच 2023-25, MBA 2022-24, B.Ed., M.Ed. 2023-25, Medical PG Diploma 2023-25, Medical PG Degree 2022-25 तथा Ph.D. के उपाधि प्राप्तकर्ताओं को प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया। इस क्रम में डीन, साइंस डॉ. कुमार सिन्हा, डीन सोशल साइंस डॉ. परसुराम सियाल, डीन मानविकी डॉ. विजय कुमार, डीन कॉमर्स डॉ. मंगला श्रीवास्तव तथा डीन मेडिसिन डॉ. संजय कुमार द्वारा क्रमशः उपाधि प्राप्तकर्ताओं का प्रस्तुतीकरण किया गया।

“जिम्मेदारी स्वीकार करने का दिन”

समारोह को संबोधित करते हुए महामहिम राज्यपाल ने कहा कि “आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नहीं है, आज जिम्मेदारी स्वीकार करने का दिन है।” उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हाथ में केवल डिग्री नहीं, बल्कि ज्ञान, संकल्प और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का प्रमाण-पत्र आ रहा है। राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता, परिवारजनों और शिक्षकों को भी बधाई दी।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में परिवार के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।उन्होंने कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में एक वर्ष से कम अवधि में दूसरी बार दीक्षांत समारोह में उपस्थित होने का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा उपाधि वितरण प्रक्रिया को अद्यतन करने की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की।

संस्कृति और जनजातीय ज्ञान को शोध से जोड़ने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि कोल्हान की धरती संघर्ष, संस्कृति और बलिदान की समृद्ध परंपरा वाली धरती है। बिरसा मुंडा सहित अनेक जनजातीय वीरों की संघर्ष-गाथाएं इस क्षेत्र की पहचान हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से कोल्हान की जनजातीय संस्कृति, भाषाओं, लोकज्ञान, इतिहास, कला, प्रकृति और पारंपरिक जीवन-पद्धति पर शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संकट और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियों के समाधान में स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में Centre for Regional and Tribal History विकसित करने की दिशा को महत्वपूर्ण बताया।

“प्रतिभा किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं”

राज्यपाल ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी ग्रामीण, जनजातीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उन्होंने ऐसे विद्यार्थियों के लिए Remedial Classes, Mentoring, Career Guidance, Language Support, Competitive Examination Guidance और Research Opportunities को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “प्रतिभा किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं है। प्रतिभा गांव में भी है, शहर में भी; गरीब परिवार में भी है और संपन्न परिवार में भी।”

शोध समाज की वास्तविक समस्याओं से जुड़ा हो

शोधार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि “शोध केवल Ph.D. की उपाधि पाने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज की किसी वास्तविक समस्या के समाधान की कोशिश होना चाहिए।” उन्होंने पेयजल, वन, कृषि, जनजातीय स्वास्थ्य, पलायन, शिक्षा, स्थानीय रोजगार, लोककला, जनजातीय इतिहास, खनिज संसाधन और पर्यावरण जैसे स्थानीय विषयों पर शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने शोध में गुणवत्ता, मौलिकता और Academic Integrity को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने अपने स्वागत संबोधन एवं विश्वविद्यालय रिपोर्ट में बताया कि कोल्हान विश्वविद्यालय के अधीन 20 अंगीभूत एवं 32 संबद्ध महाविद्यालय संचालित हैं तथा विश्वविद्यालय में 80 हजार से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि कोल्हान क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए 9 नए कॉलेज निर्माणाधीन हैं, जबकि दो अन्य कॉलेजों की स्थापना प्रस्तावित है।

परीक्षा व्यवस्था के संबंध में कुलपति ने बताया कि पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कर उनके परिणाम प्रकाशित किए गए हैं। स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए अकादमिक कैलेंडर जारी किया गया है ताकि अकादमिक सत्र में होने वाली देरी को दूर किया जा सके।

पीएचडी और शोध को प्राथमिकता

कुलपति ने बताया कि 17 विषयों में 134 शोधार्थियों का पीएचडी कोर्सवर्क पूरा हो चुका है, जबकि अगस्त 2026 सत्र में 70 विद्यार्थियों ने पीएचडी कोर्सवर्क के लिए नामांकन कराया है। पीएचडी कार्यक्रम UGC Regulations 2022 के प्रावधानों के अनुरूप संचालित किए जा रहे हैं।

शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पुस्तकालय के आधुनिकीकरण एवं ऑटोमेशन, INFLIBNET-NLIST, National Digital Library और Shodhganga जैसे संसाधनों की उपलब्धता तथा Drillbit Anti-Plagiarism Software की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है।

शोध एवं नवाचार में शिक्षकों की उपलब्धियां

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. शोभित रंजन ने AI आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस के लिए डिजाइन पेटेंट हासिल किया है। भूगोल विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता कुमारी को भारत सरकार की ICSSR से Major Research Project स्वीकृत हुआ है। इसके अलावा उन्हें Dr. Ram Dayal Munda Tribal Welfare Research Institute से भी Major Research Project स्वीकृत हुआ है।

कुलपति ने डॉ. महेंद्र कुमार राणा के शोध प्रोजेक्ट को भी विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के शोध एवं प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों को अनुसंधान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

49 अप्रेंटिस को मिला अवसर

कुलपति ने बताया कि National Apprenticeship Training Scheme के तहत पहले चरण में विश्वविद्यालय में 49 अप्रेंटिस को सफलतापूर्वक नियोजित किया गया है। प्रत्येक प्रशिक्षु को प्रतिमाह 13,650 रुपये प्रदान किए जा रहे हैं।उन्होंने e-Samarth एवं National Academic Depository के क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय की प्रगति का भी उल्लेख किया।

नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे

कुलपति ने बताया कि आगामी सत्र से चुनिंदा महाविद्यालयों में B.Lib., B.A. Journalism and Mass Communication (BJMC) सहित अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। विश्वविद्यालय परिसर में UGC दिशा-निर्देशों के अनुरूप Wi-Fi सुविधा उपलब्ध कराने तथा सुरक्षा एवं अनुश्रवण के लिए पूरे परिसर को CCTV Surveillance के दायरे में लाने की प्रक्रिया भी चल रही है।

खेल, NSS की उपलब्धियां चर्चा में

कुलपति ने कुमार कुशाग्र के भारतीय अंडर-19 टीम का हिस्सा बनने, India-A टीम में चयन तथा Australia-A के विरुद्ध शतक लगाकर Player of the Match बनने का उल्लेख किया। उन्होंने तीरंदाज अंकिता भकत और कोमोलिका बारी की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “प्रतिभा केवल बड़े शहरों की मोहताज नहीं है; प्रतिभा गांव, जंगल और पहाड़ों के बीच भी पैदा हो सकती है।”

NSS की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय और उसके महाविद्यालयों ने 57 गांवों को गोद लिया है तथा 1,000 से अधिक यूनिट रक्तदान किया है। NSS स्वयंसेवक प्रवीण प्रुसेठ द्वारा नई दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किए जाने को भी उपलब्धि बताया गया।

विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी रविराज मुर्मू को संताली फिल्म आंगेन (Aangen) के निर्देशन के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक की श्रेणी में स्वर्ण कमल मिलने को भी विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया गया।

26 टॉपरों को स्वर्ण पदक और 39 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि

समारोह में विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के 26 टॉपरों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें मानवशास्त्र की जूरा बारी, बांग्ला की लक्ष्मीमोनी मुर्मू, वनस्पति विज्ञान की ज्योत्सना रानी जेना, रसायन विज्ञान की कृति दीपा मोहंता, वाणिज्य की अमिला सिंकू, अर्थशास्त्र के बिमल बारजो, अंग्रेजी की कुमारी प्रियंका महतो, भूगोल के शुभदीप हलदर, हिंदी के संजय सोलोमन, इतिहास की बर्षा सथुआ, गृह विज्ञान की गुरुमानी सरदार, हो के माड़े कोड़ा, कुड़माली के बालकिशोर महतो, गणित के सरोज कुमार आदित्य, उड़िया की सस्मिता गिरी, दर्शनशास्त्र की शिवा पूर्ति, राजनीति विज्ञान के सागर कुमार, भौतिकी के लाल मुर्मू, मनोविज्ञान की आरती कुमारी, संस्कृत की रूपा सिंह मुंडा, संताली के गौरांग मुर्मू, उर्दू के मो. मिनहाज आलम, प्राणी विज्ञान की वजीहा खुर्शीद, एम.एड. की सुभद्रा लागुरी, एमबीए की नीलम परवीन तथा बी.एड. की इशरत परवीन शामिल हैं। इसके साथ ही 39 पीएचडी शोधार्थियों को महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के हाथों पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

समारोह का समापन

दीक्षांत समारोह के अंत में परीक्षा नियंत्रक श्रीमती रिंकी दोराई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने महामहिम राज्यपाल, विशिष्ट अतिथियों, कुलपति, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, संकायाध्यक्षों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा समारोह को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

जिम्मेदारी निभाने का आह्वान

समारोह के अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत विकास के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के हित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय के विद्यार्थी के रूप में उनकी पहचान जीवनभर उनके साथ रहेगी और उन्हें अपने कर्मों से विश्वविद्यालय का नाम ऊंचा करना चाहिए। कुलपति ने भी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जहां भी जाएं, अपने अच्छे व्यवहार, ईमानदारी और उपलब्धियों से कोल्हान विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें।

सप्तम दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का सम्मान करने के साथ-साथ कोल्हान विश्वविद्यालय को शिक्षा, शोध, नवाचार, जनजातीय ज्ञान, संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में आगे ले जाने का संकल्प भी प्रस्तुत किया. परीक्षा नियंत्रक श्रीमती रिंकी दोराइ ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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एयर नाऊ स्पेशल

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