रांची: राजधानी में दुर्गापूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के कई पुराने पूजा पंडाल इस बार भी अपनी अलग-अलग थीम और सजावट के लिए चर्चा में हैं। इनमें से कई पंडालों में सालों से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। इस बार कहीं पौराणिक कहानी, कहीं मंदिर की वास्तुकला, तो कहीं अनोखी थीम देखने को मिलेगी।
Highlights:
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रांची रेलवे स्टेशन: 1947 से हो रही पूजा
रांची रेलवे स्टेशन में वर्ष 1947 से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। इस बार यहां करीब 50 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल की थीम राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार पर आधारित है। यहां वामन अवतार, राजा बलि और पाताल लोक से जुड़े दृश्य दिखाए जाएंगे। जानकारी के अनुसार पंडाल के निर्माण में करीब 70 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
बकरी बाजार: 1958 से पूजा की परंपरा
बकरी बाजार में वर्ष 1958 से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। इस साल यहां तमिलनाडु के प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर की थीम पर भव्य पंडाल बनाया जा रहा है। पंडाल में मंदिर की वास्तुकला और नक्काशी की झलक देखने को मिलेगी। यहां पंडाल निर्माण पर करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
हटिया: 1964 से पूजा, थाईलैंड के मंदिर की थीम
हटिया में वर्ष 1964 से दुर्गापूजा की परंपरा चली आ रही है। इस बार यहां थाईलैंड के बौद्ध मंदिर की थीम पर पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल में थाईलैंड की वास्तुकला और बौद्ध मंदिरों की शैली देखने को मिलेगी। इस पंडाल के निर्माण कार्य में करीब 11 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
अरगोड़ा चौक: 1967 से पूजा, डिज्नीलैंड थीम
अरगोड़ा चौक में वर्ष 1967 से दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है। इस बार यहां डिज्नीलैंड थीम पर करीब 50 फीट ऊंचा और 40 फीट चौड़ा पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल के बीच में भोले बाबा की प्रतिमा होगी, जबकि अंदर महल जैसी आकृति के बीच करीब 14 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। पूरे आयोजन पर करीब 30 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान सामने आया है।
कोकर: 1970 से पूजा
कोकर में वर्ष 1970 से दुर्गापूजा की परंपरा चली आ रही है। इस बार यहां पंडाल में कैलाश शिला और राजस्थानी महल शैली से प्रेरित डिजाइन देखने को मिलेगा। पंडाल निर्माण कार्य में करीब 20 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
फिरायालाल: 1971 से पूजा
फिरायालाल चौक में वर्ष 1971 से दुर्गापूजा की परंपरा चली आ रही है। इस साल भी यहां मां दुर्गा की पूजा और पंडाल को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि इस बार की थीम और कुल बजट की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इस बार यहां ‘द्वारका थीम’ पर पंडाल को सजाया जाएगा और पंडाल निर्माण कार्य में करीब 80 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
हरमू: 1973 से पूजा, राजस्थानी मंदिर की थीम
हरमू में वर्ष 1973 से दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है। इस साल यहां पंडाल को काल्पनिक राजस्थानी मंदिर की शैली में तैयार किया जा रहा है। पंडाल में राजस्थानी कला और मंदिर की वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी। पंडाल निर्माण कार्य में करीब 10 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
आरआर स्पोर्टिंग: 1986 से पूजा, ‘टेंपल ऑफ टुगेदर’
रातू रोड स्थित आरआर स्पोर्टिंग क्लब में वर्ष 1986 से दुर्गापूजा की जा रही है। इस बार यहां ‘टेंपल ऑफ टुगेदर’ थीम पर पंडाल तैयार किया जा रहा है। इसमें प्रकृति, कला और आस्था को एक साथ दिखाने की कोशिश की जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण की बड़ी प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। पंडाल निर्माण कार्य में करीब 90 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
मारवाड़ी भवन: 2014 से पूजा
मारवाड़ी भवन में वर्ष 2014 से दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है। इस साल भी यहां पूजा को खास बनाने की तैयारी चल रही है। इस बार पंडाल को ‘कांतरा’ थीम बनाया जा रहा है। पंडाल निर्माण कार्य में करीब 13 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
जिला स्कूल: स्वर्वेद महामंदिर की थीम
रांची जिला स्कूल परिसर में श्री रामलला पूजा समिति की ओर से इस साल भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल की थीम वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर पर आधारित है। करीब 95 फीट ऊंचे इस पंडाल के निर्माण में लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यहां करीब 34 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी।
रांची में दिखेगा आस्था और कला का संगम
इस बार रांची के दुर्गापूजा पंडालों में वामन अवतार, बृहदेश्वर मंदिर, थाईलैंड का बौद्ध मंदिर, डिज्नीलैंड, राजस्थानी मंदिर, कैलाश शिला, ‘टेंपल ऑफ टुगेदर’ और स्वर्वेद महामंदिर जैसी अलग-अलग थीम देखने को मिलेंगी। यानी मां दुर्गा के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को अलग-अलग तरह की कला, संस्कृति और वास्तुकला देखने का भी मौका मिलेगा।


