
न्यूज डेस्क: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उनके इंडियन स्टेट से लड़ाई वाले बयान को देशद्रोह की श्रेणी में बताते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी। जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने ओपन कोर्ट में यह फैसला सुनाया। अदालत के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में न तो कोई केस चलेगा और न ही एफआईआर दर्ज होगी।
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क्या था पूरा मामला
यह मामला राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जो उन्होंने पिछले साल कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान दिया था। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस की लड़ाई अब केवल भाजपा और आरएसएस तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब यह लड़ाई ‘इंडियन स्टेट’ से भी है। उन्होंने कहा था, “अगर आप सोचते हैं कि हम सिर्फ भाजपा या आरएसएस से लड़ रहे हैं, तो आप स्थिति को नहीं समझ रहे हैं। भाजपा और आरएसएस ने देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हमारी लड़ाई भाजपा, आरएसएस और खुद इंडियन स्टेट से है।”
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राहुल गांधी पर देशद्रोह का आरोप
अपने भाषण में राहुल गांधी ने देश की संस्थाओं की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि संस्थाएं ठीक से काम कर रही हैं या निष्क्रिय हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता पर भी चिंता जताई थी। राहुल गांधी के इस बयान को लेकर सिमरन गुप्ता नाम की याचिकाकर्ता ने अदालत में शिकायत दाखिल की थी। उनका आरोप था कि यह बयान देश की संप्रभुता और भारतीय राज्य व्यवस्था के खिलाफ है और इसे देशद्रोह माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
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संभल कोर्ट में खारिज हुई थी याचिका
इस मामले में सबसे पहले संभल जिले की चंदौसी कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि, 7 नवंबर 2025 को चंदौसी कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए राहुल गांधी को राहत दे दी है।